बाबरी मस्जिद का एक सच जो आप को आज तक नहीं होगा पता

बाबरी मस्जिद की एक दिल को छू लेने वाली कहानी, ऐसा क्या हुआ के बाबरी मस्जिद को ढहाने वाले वाले आज खुद ही इस्लाम के अनुयाई बन गए, पढ़ें उनकी खुद की जुबानी जिन्होंने सबसे पहले बाबरी मस्जिद की गुम्बज पर चोट की थी.

बाबरी मस्जिद को ढहाने वाले वाले ने कहा, ‘कोई इस्लाम का अनुयायी किसी मंदिर को गिराकर मस्जिद नहीं बना सकता’

आज मुस्लिम वर्ल्ड वैबसाइट में आपको उस शख्स की मुंह जबानी और उनसे किए गए कुछ सवालों के जवाब आपको बताएंगे, जिन्होंने बाबरी मस्जिद पर सबसे पहला वॉर किया था. इस पूरी पोस्ट को आखिर तक पढे और अगर आप को अच्छी लगे तो उस को अपनी facebook प्रोफाइल पर जरूर शेयर करें शुक्रिया.

सवाल :- जब किसी धार्मिक स्थल को तोड़ना आसान नहीं तो फिर एक मस्जिद को कैसे तोड़ दिया गया

जवाब :- रामायण नामक एक सीरियल बनाया गया उस के द्वार लोगों के अंदर राम नाम की आस्था पैदा की गई फिर इसी इसी आस्था को बाबरी विध्वंश में काम लाया गया. समस्त साधु समाज को जोड़ने के लिए 1990 चरण पादुका यात्रा चलाई गई जिसके द्वारा समस्त साधु समाज को एक किया गया.

जिस समय यह यात्रा चलाई गयी उस समय देश के 4096 सीटें थी फिर 40 हजार रथ पुरे देश में भेजे गए उन्होंने पूरे देश का चक्कर लगाया और इस यात्रा की कामयाबी के बाद 6 दिसंबर एक सडयंत्र रचा गया. फिर एक नारा दिया गया

‘राम लला हम आएंगे मंदिर वही बनाएंगे’ इस नारे ने अपना काम दिखाना शुरू कर दिया.

मोहम्मद आमिर उर्फ़ (बलवीर) जिन्होंने बाबरी मस्जिद की शहादत का पूरा आँखों देखा हाल सुनाया

मोहम्मद आमिर उर्फ़ बलवीर वह शख्स है जिन्होंने बाबरी मस्जिद पर पहला बार किया था बाद में जब इन्होंने इस्लाम को करीब से जानने की कोशिश की तो इस धर्म को इन्होंने सबसे अच्छा मजहब माना और इन्होंने अपनी ज़िन्दगी में इस्लाम को अपनाया.

जिन्होंने बाबरी मस्जिद पर पहला बार किया था सुनें उसने वहां क्या महसूस किया

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