बेगुनाह मुसलमान जिसे आतंकवादी के नाम पर 11 साल जेल में रहना पड़ा

गुजरात। के मोहम्मद सलीम भी उन बदकिस्मत लोगो में से हैं, जिन्हें भ्रष्ट तंत्र और अंधे कानून का शिकार बनना पड़ा। पेशे से दर्जी रहे सलीम साल 2003 में सऊदी अरब से अपने देश लौटे रहे थे तो उन्हें अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने दबोच लिया। सलीम की माने तो जांच अधिकारियों ने उन्हें तीन अपराधों में संलिप्तता जताने के विकल्प दिए।

सलीम से कहा गया कि 2002 में हुए गोधरा कांड में नाम जोड़ा जाएगा हरेन पांड्या मर्डर केस में या अक्षरधाम मंदिर में हुए आतंकी हमले में? सलीम के मुताबिक उन्होंने जांच अधिकारियों को बहुत समझाने की कोशिश की कि वो तकरीबन 13 साल से सऊदी अरब में रोजी-रोटी कमा रहे थे.

उनका किसी भी मामले से कोई वास्ता नहीं है। लेकिन जांच अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी और अक्षरधाम आतंकी हमले में उन्हें नाप दिया। साल 2006 में पोटा कोर्ट ने सलीम को उम्रकैद की सजा सुनाई। सलीम को दी गई सजा उनके परिवार के लिए नासूर साबित हुई। बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ रहे थे, उन्हें नगर निगम के स्कूल में पढ़ना पड़ा। एक भाई की ग्रेजुएशन चल रही थी तो उन्हें घर की रोजी-रोटी चलाने के लिए पढ़ाई छोड़नी पड़ी और ऑटो-रिक्शा चलाना पड़ा।

सबसे घातक ये था कि 11 साल तक आतंकवादी का परिवार कहलाना पड़ा। सलीम के अलावा पांच और को झूठे आरोपों में आतंकी चोला पहनाया गया। मुफ्ती अब्दुल कय्यूम, आदम अजमेरी, चांद खान को अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। वहीं दो अन्य आरोपी अब्दुल मियां कादरी और अल्ताफ हुसैन को दस साल कैद की सजा सुनाई गई थी। आखिरकार 16 मई 2014 को अदालत ने सलीम समेत 6 को बाइज्जत बरी कर दिया।

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