भोपाल एनकाउंटर, नजीब व तलाक विरोधी आंदोलन को ध्वस्त करने की साजिश है ”नोटों” का खेल- अशफाक रहमान

राष्ट्रवादी जनता दल के राष्ट्रीय संयोजक अशफाक रहमान ने कहा है कि नोट के खेल में मुसलमानों को नहीं पड़ना चाहिए क्योंकि मुसलमानों की मौजूदा हालात से देश का ध्यान बांटने की यह सुनियोजित साजिश है पीएम मोदी और सरकार की।

अशफाक ने कहा की मां अपने बेटे व जेएनयू के छात्र नजीब अहमद को दर ब दर भटक कर तलाश रही हैं वहीं केंद्र सरकार नोट का खेल खेलना चालू कर दिया है उन्होंने कहा कि नोट के खेल में पूरे देश को इस तरह उलझा दिया गया है कि जनता देश की तमाम दीगर समस्याओं से बेगाना होकर बस नोटों में लग गयी है।

अशफाक रहमान ने अपने बयान में कहा कि कल तक दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर समस्या से सारा देश चिंतित था लेकिन अब ऐसा लगता है कि दिल्ली के प्रदूषण की समस्या रातोंरात खत्म हो गयी है. इसी तरह देश के 25 करोड़ मुसलमान अपनी बुनियादी समस्याओं को भूल गये हैं.

आर्थिक लिहाज से मुसलमान पहले से ही टूटे हुए हैं जिसका उल्लेख सचर कमेटी की रिपोर्ट में भी किया गया है लेकिन मुसलमान भी नोट के खेल में उलझ गये हैं।

उन्होंने कहा कि मुसलमान अपने हालात पर ध्यान देंगे तो बरसों गुजर जायेंगे. ऐसा में सवाल यह है कि मुसलमान करेंसी की राजनीति में क्यों उलझे? उन्होंने सवाल किया कि गरीबी की खाई में डूबे मुसलमानों को नोट की बहसबाजी से क्या मिलने वाला है उन्होंने कहा कि मुसलमान अपने दुख से दुखी न हो कर आम लोगों के सुख से दुखी हैं मुसलमान यह भूल गया की तीन तलाक मुद्दे को भी सुलजान है।

रहमान ने कहा कि JNU छात्र नजीब के लापता होने, तलाक, भोपाल के फर्जी एनकाउंटर और युनिफार्म सिविल कोड के खिलाफ देश भर में मुसलमानों के उठे आंदोलन को ठंडा करने की यह सोची समझी साजिश है और अफसोस की बात यह है कि मुसलमान इस साजिश के शिकार भी हो गये हैं.

अब देश के मुसलमान न नजीब की तलाश की मांग कर रहे हैं और न भोपाल में फर्जी मुठभेड़ में सिमी कार्यकर्ताओं की हत्या की जांच की मांग कर रहे हैं. इसी तरह युनिफार्म सिविल कोड के खिलाफ सरकार की साजिश का शोर उठ रहा है उन्होंने याद दिलाया कि नोटों की सियासत के आगे मुसलमानों की तमाम समस्यायें दब कर रह गयी हैं.

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