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गले में तावीज़ पहनना किस हद तक जायज़ छोटा सा वीडियो जरूर देखें और शेयर करें

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ताबीज, गण्डा अमूमन इण्डिया और पाकिस्तान के लोगों के गलों में ज्यादातर पहने हुए देखा गया है। और लोगों का मानना यह है, की वह उन्हें गन्दी आफत और मुसिवतों से बचाता है। मगर यह बात किस हद तक सही है।

अल्लाह ने कुरआन को शिफ़ा कहा यह बात सही है। मगर अल्लाह ने ज़म ज़म के पानी को शिफ़ा कहा शहद का शिफ़ा कहा जैतून के तेल को शिफ़ा कहा कलौंजी को भी शिफ़ा कहा। मगर इन चीजों के उपयोग पर शिफ़ा कहा इन चीजों को गले लटकाने से शिफ़ा नहीं मिलता इसका सऊदी हजरात ने बड़ी ही आसानी से जवाब दिया जो की आप वीडियो में सुन सकते है।

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अल्लाह ने कुरआन में सभी बीमारियों का इलाज दिया और अभी तक का जो भी साइंस पैदा हुआ वह कुरआन से पैदा हुआ, मगर अल्लाह ने कुरआन को पड़ने और सुनने को शिफ़ा कहा अगर आप और हम कुरआन को सुनेगे और पड़ेंगे तो यह शिफ़ा और बरकत की वजह बनेगा।

आप के गले में पहने हुए ताबीज जिसमे कुरआन की आयत का ज़िक्र आया है, वह आप गन्दी जगह पहन कर चले जाते ह, जिससे कुरआन की बेअदबी होती है। आप और हम को इस बात को समझना चाहिए की कुरआन पड़ने और समझने की चीज है न की गले पहनने की अगर गले में डालने से कुरआन शिफ़ा और बरकत देता है, तो पड़ने से और ज्यादा शिफ़ा और बरकत देगा।

जिस तरह घर में रखा इत्र खुश्बू देता है, मगर कपड़ों पर लगाने से और ज्यादा खुश्बू देता है।

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