हिजाब मेरे लिए इस्लाम का दिया हुआ एक नायाब तोहफ़ा – बुशरा नाज़

हिजाब मेरे लिए इस्लाम और अल्लाह का दिया हुआ एक नायाब और पसंदीदा तोहफा है। जिसने मुझे और मेरी इज्जत को गन्दी नज़रो से बचाकर रखा है। इस्लाम ने हम महिलाओं के लिए जितने अधिकार दिए है। शायद ही किसी मजहब की कोई किताब में हों। मेरा मानना यह है की हिजाब मुस्लिम महिलाओं की एक बहुत बड़ी जरूरत है। न की मज़बूरी।

हिजाब में रहते हुए मेने जितना अपने आप को सुरक्षित महसूस किया है। शायद ही किसी और लिवास में मैने कभी अपने आप को इतना सुरक्षित महसूस नहीं किया। और जो लोग मुस्लिम महिलाओं के अधिकार की बात करते है। में उन लोगों से कहना चाहती हूँ की वह हमारे अधिकारों की फ़िक्र करना बंद करदें।

क्योकि इस्लाम ने महिलाओं के लिए अधिकार दिए है। जो क़ुरआन और अहदीश में मौजूद है। यह बात अलग है। इस्लाम में मर्यादा पहली सीढ़ी है। इस्लाम ने जो अधिकार मुस्लिम महिलाओं को दिये है। वह सब इस्लाम की मर्यादा और सिद्धांतों को ध्यान में रखकर दिए है। में हिजाब से पूरी तरह खुश हूँ।

मुझे हिजाब पहनने में कोई हिचकिचाहट महसुस नहीं होती। मेने ख़ुशी ख़ुशी हिजाब को अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बनाया है।

बुशरा नाज़-
बुशरा नाज़ मध्यप्रदेश से है। जिन्होंने अभी कुछ महीने पहले ही अपनी कॉलेज की शिक्षा पूरी की है। जिसके बाद वह एक न्यूज़ चैनल के लिए काम करती है। जिन्होंने अपने कॉलेज की पूरी शिक्षा हिजाब में रहकर पूरी की है। स्टूडेंट बुशरा नाज़ का कहना यह है। की हिजाब को वही महिला समझ सकती है। जिसने हिजाब को अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बनाया हो मेरे पास कोई शब्द नहीं जो हिजाब की अच्छाई वयां कर सके।

हिजाब (पर्दा प्रथा) जो की हर मजहब (धर्म) में कही न कही जरुरी सिद्धांत बताया गया है। चाहे वह कोई भी मजहब(धर्म)हो।

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