देखें- किस तरह जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने देश की आज़ादी में अहम् भूमिका निभाई

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की स्थापना 19 नवंबर 1919 को हुई थी. इसके संस्थापको में शेख-उल-हिंद मौलाना महमूद हसन, मौलाना सैयद हुसैन अहमद मदनी, मौलाना अहमद सईद देहलवी आदि समेत कई मुस्लिम विद्वान शामिल थे.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद आजादी के वक्त एक ऐसा संगठन था, जिसने अलग पाकिस्तान के गठन का जमकर विरोध किया था. यह संगठन अपने राष्ट्रवादी विचारों और दर्शन के लिए जाना जाता है. जमीयत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में विश्वास रखती है.

दिल्ली के बहादुरशाह जफर मार्ग पर इस संगठन का मुख्यालय स्थित है। जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने सबसे पहले देश की संपूर्ण आज़ादी का बिगुल फूंका और देश की संपूर्ण आज़ादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया, देश की आज़ादी के लिए जमीयत उलमे ए हिन्द के बहुत से उलेमाओं ने कुर्वानी दी, जो की आज तक किताबों में मौजूद है.

हज़ारों उलेमाओं को शहीद किया गया, इस संगठन ने क्या भूमिका निभाई आप इस वीडियो में देख सकते है।

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