मजहब और इंसानियत के दुश्मनों पर भारतीय सेना का सटीक वार-सुधीर परिहार

पाकिस्तान से आकर भारत में बेकसूर लोगों का खून बहाने वालों को सबक सिखाने की बैचेनी भारतीय जनमानस में सहन करने की हद से टकरा रही थी उसे यह खबर सुनकर बहुत ही सुकून मिला है कि भारतीय जांबाज सैनिक पाकिस्तान में घुसकर काफिरों को जेहन्नुम का रास्ता दिखाने में कामयाब हुए हैं।

कल रात अंजाम दिए गए बेहद योजनाबद्ध तरीके से सीमा पार के सात आतंकी कैंपों पर हमला कर अभी तक की सूचना के आधार पर 38 से भी ज्यादा आतंकियों को मारने की पुष्टि हुई है। इस पूरी कार्यवाही में भारत के वीर और साहसी जवानों को एक खरोंच भी नहीं आई यह गर्व के साथ हमारी सेना की ताकत और विशेषज्ञता का भी परिचायक है।

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सुधीर परिहार, वरिष्ठ पत्रकार

पाकिस्तान ने भारत के दावे को हालांकि नकारा है, लेकिन एक नाकारा देश के नकारे जाने को तरजीह भी कौन देगा? पाकिस्तान के हुक्कमरान दलील देते हैं कि पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति सम्पन्न देश है और उसे कमजोर मानने की भूल भारत को नहीं करना चाहिए। यह ठीक है कि भारत एक शांतिप्रिय और जिम्मेदारी से विकासशील देशों का नेतृत्व करने वाला देश है, लेकिन उसे अपनी सम्प्रभुता की रक्षा करने का भी पूरा अधिकार है।

लगातार आतंकवादी घटनाओं में पाकिस्तान के हाथ होने और कश्मीर में भारतीयों को भड़काने की कार्यवाहियों से देश में भारी गुस्सा और सरकार के कार्यवाही न करने के निर्णय से विक्षोभ बढ़ रहा था। इन परिस्थितियों में बहुपक्षीय रणनीति के एक हिस्से के रूप में पाकिस्तान में बैठे काफिरों को ठोस और दो-टूंक जबाव यह सर्जिकल स्ट्राइक को भी बहुत जरूरी उपाए के रूप में देखा जाना चाहिए। सरकार और सेना ने इसे उचित मौके पर उचित सावधानी के साथ प्रयुक्त किया है।

सैनिक कार्यवाही का समय भी सार्क सम्मेलन के रद्द होने के फैसले के साथ ही किया गया, जो इसके प्रभाव को एक स्पष्ट संदेश के साथ विश्व में जाएगा। सार्क देशों में जिस तरह भारत ने अपनी बात रखी और पाकिस्तान की आतंकवादी नीयत को बेपर्दा किया उससे सहमत होकर बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका और अफगानिस्तान के भारत के साथ खड़े होने से पूरी दुनिया में एक स्पष्ट और मजबूत संदेश मिला है, सार्क की बैठक तो रद्द होनी ही थी और वो पाकिस्तान के मुंह पर तमाचा मारती हुई रद्द हो गई।

अमेरिका और चीन ने भी पाकिस्तान से सीधे शब्दों में पल्ला झाड़कर यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के मामले में वह पाकिस्तान के साथ अब खड़े होना नहीं चाहते। पाकिस्तान पर निश्चित ही चीन और अमेरिका का यह रूख बहुत दबाव उत्पन्न करने वाला है। एक बड़ी दलील परमाणु हमले की आशंका के कारण पाकिस्तान के साथ सैनिक कार्यवाही के खिलाफ सामने आती रही है।

इस मामले में यह ध्यान रखना होगा कि पाकिस्तान के शासकों की मानसिकता कुत्ते की दुम जैसी टेढ़ी होने की कहावत से मिलती है और आगे पाकिस्तान की परमाणु शक्ति में वृद्धि ही होनी है अत: भारत को उसकी परमाणु क्षमता को नकारा करने की ताकत, तकनीक और कूटनीति तीनों ही अभी के अवसर पर अजमाना कोई बहुत गलत निर्णय नहीं है।

गीदड़ भभकी देने वाले पाकिस्तान के स्वार्थी शासकों की औकात इतनी नहीं है कि वह भारत को थोड़ा सा नुकसान पहुंचाकर अपनी मैयत का पूरा इंतजाम करवाने की घोषित योजना पर काम करें। फिर भी हमें पूरी सावधानी से अपनी क्षमताओं और तकनीकी ताकत का उपयोग देश की सुरक्षा और प्रतिष्ठा के लिए करना ही जरूरी है और उसे सबसे ज्यादा उचित तरीके से करने का कार्य इस सर्जिकल स्ट्राइक द्वारा हो सकता था.

और सेना के मनोबल के लिए भी यह बहुत जरूरी था। पूरा देश एक मानसिकता बना लेगा तो किसी भी स्थिति से यह देश एकजुट होकर निपट सकता है इस बारे में कोई संदेह नहीं होना चाहिए। इस मामले में पूरा देश प्रधानमंत्री और सरकार के साथ-साथ देश की सेना के साथ खड़ा हुआ है और मजबूती से खड़ा रहेगा।⁠⁠⁠⁠

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