वीडियो: विदिशा में हालात ख़राब कर्फ्यू के दौरान भी बेखौफ घूम रहे हैं दंगाई, क्या सरकार के इशारे पर यह सब हो रहा है?

मध्यप्रदेश के विदिशा में बजरंगदल का नेता दीपक कुश्वाहा दो दिन से मुर्गे की दुकान पर जाकर मुर्गा बेचने वाले दुकानदार के साथ मारपीट करता था। तीसरे दिन भी जब उसने दुकान पर जाकर मारपीट की तो दुकानदार ने कुछ लोगों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। इस हत्या को किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता, न ही इसे एक्शन का रिएक्शन कहा जा सकता।

क्या सरकार के इशारे पर यह सब हो रहा है?

हां बजरंगदल का नेता जिसकी हत्या हुई है उसकी मारपीट के कारनामे को भी तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता। बजरंगदल के नेता की हत्या की खबर क्षेत्र में आग की तरह फैल गई, और फिर उसने एक सांप्रदायिक हिंसा का रूप अख्तियार कर लिया। विदिशा में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

मध्यप्रदेश इन दिनों संघ की प्रयोगशाला बनने जा रहा है, व्यापम से लेकर दलितों, अल्पसंख्यकों पर होने वाले हमलों में घिरी सरकार सांप्रदायिकता की आग झोककर अपना दामन पाक साफ करना चाहती है। जो लोग इस हत्या में शामिल हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रावाई होनी चाहिये, साथ ही किसी भी संगठन के कार्यकर्ता को किसी पर भी दादागिरी दिखाने का अधिकार नहीं है यदि वह ऐसा करता है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रावाई होनी चाहिये। जो लोग, जो संगठन इस हत्या के बाद बजाय कानून पर भरोसा करने के खुद का कानून थोपना चाह रहे हैं उनके खिलाफ भी सख्त कार्रावाई होनी चाहिये। क्या ऐसा मुमकिन है?

यह मुमकिन अपने आप में बड़ा सवाल है क्योंकि विदिशा से जो तस्वीरें आईं हैं उन्हें देखकर लगता है कि पुलिस खुद कानून से खिलवाड़ करने की इजाजत दे रही।

यह तस्वीर क्षेत्र के कर्फ्यूग्रस्त क्षेत्र की है, जहां पुलिस के साथ दंगाई हाथो में डंडा लिये कर्फ्यूग्रस्त इलाको में बेखौफ घूम रहे हैं। आखिर धारा 144 का मतलब ही क्या है?

जब दंगाई पुलिस के साथ घूम रहे हों?

यह तस्वीर सबकुछ बयां कर रही है पुलिस की दंगाईयों के साथ हुई साठ गांठ भी और दंगाईयों को मिलने वाला सरकारी संरक्षण भी। जैसा कि ऊपर कहा गया है कि मध्यप्रदेश संघ की प्रयोगशाला बनने जा रहा है। केन्द्र में भाजपा की सरकार आने की बाद तो मध्यप्रदेश के कई शहर दंगों की आग में जले हैं, नीमच, रतलाम, इंदौर, बैतूल, भोपाल और अब विदिशा भी सांप्रदायिक दंगों की आग में झुलस गया है।

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने लालकिले से अपने पहले संबोधन में कहा था कि ‘सांप्रदायिकता जहर है’ बेशक सांप्रदायिकता जहर है, मगर यह जहर खाकी के साथ क्या कर रहा है यह सवाल उठाने की जरूरत है?

जब क्षेत्र में कर्फ्यू लगा है, धारा 144 लागू है उसके बावजूद भी बेखौफ ये दंगाई कैसे घूम रहे हैं?

या फिर पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से दुकानों, मकानों, इबादतगाहों को आग लगाई गई है?
(वसीम अकरम त्यागी सामाजिक सेवक तथा स्वतंत्र वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह सच और केवल सच ही लिखतें हैं। इनकी लेखनी बेबाक है। वसीम अकरम त्यागी फेसबुक यूज़र हैं। यह लेख उनकी टाइम लाइन से लिया गया है। इस लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं, इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी Muslimworld.in स्‍वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है।

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