वुज़ू में ही छिपा है आपकी तंदुरुस्ती का राज़, और नंबर 4 वाला पढ़कर तो हैरान रह जायेंगे आप

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नमाज से पहले बनाए जाने वाला वुजू इंसानी स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है आपको यह पोस्ट आखरी तक ज़रूर पढ़ना चाहिए. अभी हाल ही में सालों में हुई खोजों से यह सिद्ध हुआ है कि वुजू करना ना केवल कई बड़ी-बड़ी बीमारियों से हमारी हिफाजत करता है बल्कि स्वास्थ्य के मोर्चे पर हमें पूरी तरह से फिट और एक्टिव बनाए रखता है.

वुज़ू के फायदे

कुछ शोध वुजू के बारे में

हमारे प्यारे नबी पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. ने रोज़ाना रात को सोने से पहले वुजू बनाकर सोने के लिए ऐसे ही प्रोत्साहित नहीं किया. इसके पीछे अपने आपको तंदुरुस्त रखने का ये गहरा राज़ इसमें छुपा हुआ है. वैसे इस जमाने में आप देखें तो योगा एक्सपर्ट भी सोने से पहले हाथ-पैर, मुंह, आंखें आदि को धोने की सलाह हमें देते हैं ताकि आपकी बॉडी को पूरी तरह सुकून और आराम मिले और हमें गहरी, सुकून की नींद आए.

वैज्ञानिक प्रोफेसर जॉर्ज ऐल के अनुसार वुज़ू के फायदे

वैज्ञानिक प्रोफेसर जॉर्ज ऐल कहते हैं जब कोई अपना मुंह धोता है तो उसकी दाढ़ी में मौजूद कीटाणु साफ हो जाते हैं और इतना ही नहीं पानी से गीली होने पर दाढ़ी के बालों की जड़ें मजबूत होती हैं। यही नहीं दाढ़ी के बाल पानी से तर होने से गर्दन की कोशिकाओं, थाइराइड ग्लैंड्स और गले संबंधी बीमारियों से हमारा बचाव होता है. ये चाहे तो आप गूगल पर सर्च करके भी देख सकते हैं.

वुज़ू के दौरान कोहनियां धोने के फायदे

इंसानी शरीर में कोहनी में तीन ऐसी नसें हैं जो दिल, दिमाग और लीवर से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। देखा गया है कि कोहनियां अक्सर ढकी रहती हैं। कोहनियों को हवा नहीं लगने और उन्हें पानी से नहीं धोते रहने से कई तरह की मानसिक और मस्तिष्क संबंधी जटिलताएं पैदा हो जाती हैं। इस तरह हम देखते हैं कि वुजू में कोहनियों सहित हाथ धोने से ना केवल हमारे दिल, दिमाग और लीवर को मजबूती मिलती है बल्कि इनसे संबंधित होने वाली परेशानियों से निजात मिलती है।

एक अमरीकी वैज्ञानिक के अनुसार

पानी तनाव दूर करने, राहत और सुकून हासिल करने का बेहतरीन जरिया है. संचार प्रणाली, प्रतिरक्षा प्रणाली और शरीर का इलेक्ट्रोस्टेटिक बेलेंस

संचार प्रणाली

इंसानी बॉडी में संचार प्रणाली दोतरफा होती है। पहले दिल शरीर के हर हिस्से की उत्तक कोशिकाओं को खून सप्लाई करता है। फिर यह जैविक इस्तेमाल किया गया खून एकत्र करता है। अगर यह रिवर्स संचालन (दूसरा संचार) गड़बड़ा जाता है तो ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और ऐसे हालात में इंसान की मौत तक हो जाती है। बेहतर सेहत और दोहरी संचार प्रणाली के लिए जरूरी है कि रक्त वाहिकाएं सही तरीके से अपना काम अंजाम देती रहें।

रक्त वाहिकाएं लचीले ट्यूब की तरह होती हैं जो दिल से दूर पतली शाखाओं के रूप में फैली रहती हैं। अगर ये पतले ट्यूब कठोर हो जाते हैं और अपना लचीलापन खो देते हैं तो दिल पर दबाव बढ़ जाता है। मेडिकल लैंग्वेज में इसे arteriosclerosis ( धमनी कठिनता) के रूप में जाना जाता है। रक्त वाहिकाहों के लचीलापन खोने और कठोर होने के कई कारण होते हैं। उम्र बढऩे और शारीरिक गिरावट, कुपोषण, नर्वस रिएक्शन्स आदि के चलते रक्त वाहिकाहों पर ऐसा बुरा असर पड़ता है।

रक्त वाहिकाओं का सिकुडऩा और कठोर होना एकदम से ही नहीं हो जाता बल्कि यह विकृति एक लंबा समय लेती है। ये वाहिकाएं जो दिल से दूर दिमाग, हाथ और पैरों तक फैली रहती है, इन रक्त वाहिकाओं में धीरे-धीरे यह शुरू होता है और लगातार ऐसा होने पर एक लंबे टाइम बाद इन रक्त वाहिकाओं में यह विकृति पैदा होती है।

हालांकि हमारे रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसा तरीका है जो इन रक्त वाहिकाओं को लचीला और फिट बनाए रखने में कारगर है। इसमें अहम भूमिका अदा करता है पानी जो तापमान के मुताबिक पूरे बदन की इन रक्त वाहिकाओं के इस लचीलेपन को बेहतर और दुरुस्त बनाए रखता है। पानी तापमान के मुताबिक उत्तकों (टिश्यूज) पर दबाव बनाकर सुस्त संचालन के कारण हुए जमाव को दूर कर इन टिश्यूज को पोषकता प्रदान करता है और रक्त संचरण को फिर से पटरी पर लाता है.

उपर्युक्त तथ्यों के मद्देनजर हम देखें तो हम आसानी से समझ लेते हैं कि वुजू की हिदायत देने वाली कुरआन की ऊपर लिखी आयत कितनी चमत्कारिक है। जैसा कि आयत में निष्कर्ष के तौर पर कहा गया है….’बल्कि वह चाहता है कि तुम्हें पवित्र करे और अपनी नेमत तुम पर पूरी कर दे।’ हमें पैदा करने वाले का हमें वुजू बनाने का यह आदेश देना हमारे हित में है। यह पूरी तरह साफ है कि रक्त का बेहतर संचरण बने रहना हमारे लिए नेमत ही है क्योंकि बेहतर स्वास्थ्य के लिए दुरुस्त रक्त वाहिकाएं और अच्छी संचार प्रणाली जरूरी है। यह तो वुजू के कई फायदों में से एक फायदा है।

यह एकदम साफ है कि बदन पर पानी का इस्तेमाल हमें जल्द बुढ़ापे की ओर जाने से हमारी हिफाजत करता है। इस तरह हम देखते हैं कि अगर कोई शख्स बचपन से ही नियमित वुजू कर रहा हो तो आखिर उसके मस्तिष्क में बेहतर रक्त परिसंचरण क्यों नहीं होगा?

प्रतिरक्षा प्रणाली

बॉडी में लाल रक्त कोशिकाओं के अलावा श्वेत रक्त कोशिकाओं का संचरण भी होता है। इन श्वेत कोशिकाओं के संचरण को अंजाम देने वाली वाहिकाएं लाल रक्त कोशिकाओं की वाहिकाओं की तुलना में दस गुना कम पतली होती है। कई बार हम घाव या खरोंच आने पर त्वचा की दीवार पर सफेद से रिसने वाले द्रव्य को देखते हैं। इसे कहते है लिम्फैटिक सर्कूलेशन (लसिका का परिसंचरण) जो हमारे बदन की प्रतिरक्षा प्रणाली की मजबूत तरीके से हिफाजत करता है.

जब कभी हमारे बदन पर किसी जीवाणु, बाहरी ऑब्जेक्ट या कैंसर कोशिका (जिसका कारण अभी जाना नहीं गया है) का हमला होता है तो लसिका परिसंचरण के चलते श्वेत कोशिका इन्हें नष्ट कर हमारी इनसे हिफाजत करती है. बॉडी की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने से संक्रामक रोग या कैंसर जैसे रोग अचानक हम पर हमला बोल देते हैं. हालाकि इन कोशिकाओं की गतिविधि पूरी तरह सामने नहीं आई है लेकिन सर्दी और गर्मी का असर इस प्रणाली पर देखा गया है.

यानी आम सर्दी में होने वाले संक्रामक रोग के लिए सफेद रक्त वाहिकाओं की यह कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली ही जिम्मेदार है. इस प्रतिरक्षा प्रणाली और इसकी बारीक वाहिकाओं का बेहतर संचालन होता है अगर बॉडी को धोया जाए.
आसान शब्दों में यह कहा जा सकता है कि जिस तरीके से पानी के इस्तेमाल से संचार प्रणाली मजबूत बनती है ठीक उसी तरह बॉडी पर पानी के इस्तेमाल से प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूती मिलती है.

इस तरह हम जान सकते हैं कि कई तरह के रोगों से हमारी हिफाजत करने वाली प्रतिरक्षा प्रणाली वुजू किए जाने से मजबूत होती है और इस तरह अल्लाह वुजू के मामले में अपनी आयत में जो बयान करता है, सही साबित होता है।
हालांकि कोई शख्स यह दावा कर सकता है कि लसिका का बेहतर परिसंचरण और प्रतिरक्षा प्रणाली का मजबूत होना मुख्य रूप से बॉडी धोने से जुड़ा है और यह मात्र संयोग ही है कि वुजू में भी शरीर के अंग धोए जाते है। लेकिन जिस तरह वुजू करने का तरीका बताया गया है उस तरीके पर गौर करें तो यह दावा गलत साबित होता है और यह साफ हो जाता है कि यह फायदा वुजू से ही हासिल किया जा सकता है।

आखिर वुजू में ही ये फायदे क्यों छिपे हैं, इसकी मुख्य वजह हैं

१. लसिका प्रणाली के बेहतर संचालन या कहें मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए यह जरूरी है कि बदन का कोई भी हिस्सा पानी से अछूता नहीं रहना चाहिए और ऐसा वूजू या गुस्ल से ही संभव है.

२. लसिका प्रणाली को मजबूती देने में नाक के अंदर की कोमल हड्डी तक का हिस्सा और टोंसिल सबसे महत्वपूर्ण है और इन हिस्सों को वुजू के दौरान धोना शामिल है.

३. गर्दन के दोनों तरफ के हिस्से भी लसिका प्रणाली बेहतर संचालन में काफी मददगार हैं और वुजू में इन हिस्सों को धोना भी शामिल है.

बॉडी की दुर्जेय योद्धा मानी जाने वाली लिम्फोसाइट कोशिकाएं शरीर के दूर तक के हिस्सों से गहन जैविक प्रशिक्षण के तहत गुजरती है और दिन में कई बार बॉडी के हर हिस्से पर गश्त करती है। इसे आसान जबान में यूं समझा जा सकता है कि बॉडी की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती देने वाली लिम्फोसाइट कोशिकाएं पूरे बदन में एक सिस्टम के तहत एक दिलेर फौजी की तरह शरीर के हर हिस्सों पर गश्त कर हमारी हिफाजत में जुटी रहती हैं। ऐसे में जीवाणु और कैंसर कोशिका से इनका मुकाबला होने पर वे इन्हें नष्ट कर हमारी हिफाजत करती है.

गौर करने वाली बात यह है कि क्या यह हमारे लिए पहले दर्जे की ईश्वरीय नेमत नहीं है? मान लीजिए एक समय में एक बार सर्कूलेटरी डिसऑर्डर (संचार विकार) हो जाता है और हमारी नियमित वुजू बनाने की आदत से हम इससे निजात पा जाते हैं तो क्या यह हमारे लिए बेशकीमती ईश्वरीय वरदान नहीं हुआ जो वह वुजू बनाने पर अपनी नियामत पूरी करने का वादा करता है। क्या यह इंसानियत पर ईश्वर का एहसान नहीं हुआ जिसका शुक्र इंसानों को अदा करना चाहिए.

स्टेटिक इलेक्ट्रिसिटी (स्थिर विद्युत)

साधारणत हमारी बॉडी की स्टेटिक इलेक्ट्रिसिटी (स्थिर विद्युत) संतुलित अवस्था में रहती है और यह संतुलित स्थिर विद्युत हमें स्वस्थ और तंदुरुस्त बनाए रखने में अहम रोल अदा करती है। शरीर में होने वाले दर्द, चिड़चिड़ापन और चेहरे पर होने वाले मुंहासे बॉडी की इसी स्थिर विद्युत का संतुलन गड़बड़ाने का ही नतीजा है। हम इस इलेक्ट्रिसिटी का एहसास कार से नीचे उतरने पर या फिर प्लास्टिक की कुर्सी से उठने के बाद कर सकते हैं.

एक्यूपंक्चर और फिजियोथेरेपी के जरिए बॉडी की इस स्टेटिक इलेक्ट्रिसिटी को संतुलित किया जा सकता है लेकिन हम दिन में कई बार वुजू बनाकर स्टेटिक इलेक्ट्रिसिटी को संतुलित बनाए रख सकते हैं। कई ऐसी परेशानियां हैं जो इसके असंतुलन से पैदा होती हैं लेकिन मैं यहां सिर्फ त्वचा संबंधी देखभाल पर बात करूंगा जो आज के जमाने में एक फैशनेबल सब्जेक्ट है। स्थिर इलेक्ट्रिसिटी के असंतुलन का सबसे बुरा असर चेहरे पर झुर्रियों के रूप में शुरू होता है और पूरे बदन की त्वचा इससे प्रभावित होती है.

लेकिन वे खुशकिस्मत लोग जो अपनी जिंदगी में वुजू को अपनाए रहते हैं, अल्लाह की नेमत का फायदा उठाते हैं और इस परेशानी से बचे रहते हैं। हम कह सकते हैं कि जो कोई शख्स नियमित रूप से धोने की अपनी आदत को बरकरार रखता है तो वह अधिक सेहतमंद और खूबसूरत त्वचा का धनी होता है।

गौरतलब है कि हमारे इस दौर में जब लाखों रुपए सौदंर्य प्रसाधनों के रूप में खर्च किए जा रहे हैं, क्या ऐसे में यह
यहां कोई शख्स दावा कर सकता है कि उसकी भी हाथ-मुंह आदि धोने की आदत है। चलिए ठीक है, पर जरा आप गौर करें क्या अक्सर लोगों के बीच ऐसी ही आदत है या फिर आम लोगों की यह आदत क्या बरसों बरस पुरानी है.

आम लोगों के बीच की इस आदत का इतिहास मुश्किल से सत्तर साल पुराना होगा। बल्कि इस तरह साफ-स्वच्छ रहने की यह व्यापक आदत उन देशों में भी इन सालों से पहले नहीं पाई जाती थी जो आज के वक्त में सबसे ज्यादा सभ्य और विकसित देश होने का दावा करते हैं।

साफ-सुथरा रहने की अन्य आदतें वुजू का मुकाबला नहीं कर सकतीं क्योंकि इस्लाम ने वुजू करने को इबादत का एक जरूरी हिस्सा करार देकर इसे मुसलमानों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ दिया है और यह मुसलमानों की आदतों में शुमार हो गया है। यकीन मानिए वुजू के फायदे सिर्फ यही नहीं है जिनका मैंने जिक्र किया है बल्कि अमल करने वाले मुस्लिम की सामान्य हैल्थ में भी वुजू का योगदान होता है।

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