पुलिस कर ले आपको गिरफ्तार तो बड़े काम आएंगे ये आपके पांच अधिकार…

पुलिस जो लोगो की सुरक्षा करती है और जरूरत पड़ने पर दोषी और अपराधी व्‍यक्‍ति को गिरफ्तार भी करती है. यदि आप की किस्मत ख़राब है और आप किसी कारणवश पुलिस स्टेशन तक पहुंच गए हैं, या फिर किसी वजह से आपकी गिरफ्तारी की नौबत आ जाती है, तो भारत में आपको मलतब की भारतीय संविधान के कानून अनुसार आपको कुछ अधिकार दिए गए जो आपको इस मुसीबत से निकलने में आपकी मदद करेंगे और यदि कोई और परेशानी होगी तो ये उसे ख़त्म कर सकते है वो पांच अधिकार नीचे दिए है.

पहला अधिकार : यदि आपको किसी मामले में पुलिस गिरफ्तार करने आती है, तो आपका यह पहला अधिकार है कि आप उससे पुलिस होने का आईडी या पहचान पत्र मांगें. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के मेंबर और पेशे से वकील राजीव अग्रवाल कहते हैं कि यदि किसी मामले में आप पर गिरफ्तारी की नौबत आती है तो आपका यह अधिकार है कि आप संबंधित पुलिस अधिकारी से बात कर सकते है.

दूसरा अधिकार: गिरफ्तार होने वाले व्‍यक्‍ति का यह अधिकार है कि वह अपने कानूनी अधिकार की जानकारी ले. राजीव कहते हैं कि गिरफ्तारी के दौरान आप पुलिस से अपने कानूनी अधिकार मांग सकते हैं. यही नहीं आप अपने रिश्‍तेदारों, फैमिली मेंबर्स और परिचित को कॉल भी कर सकते हैं एवं उन्‍हें सहायता के लिए बुला सकते हैं. ये भी आपका अधिकार है.

तीसरा अधिकार: तीसरा महत्‍वपूर्ण अधिकार है क्योंकि ये गिरफ्तार होने की स्‍थिति में काम आता है अधिकार ये है कि संबंधित व्‍यक्‍ति अपने वकील से संपर्क करे. गिरफ्तार होने की स्‍थिति में वकील की सेवाएं लेने का पूरा अधिकार है. यही नहीं आप उसी समय पुलिस को बुला सकते हैं. यही नहीं यदि वकील करने की स्‍थिति नहीं है तो न्‍यायालय से अपील की जा सकती है और ऐसी स्‍थिति में कोर्ट आपको वकील हायर करने का अधिकार देती है.

चौथा अधिकार: यदि आपको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और तो आप घबराये क्योंकि पुलिस आपको केवल 24 घंटे तक ही हिरासत में रख सकती है, और यदि पुलिस को और ज्यादा दिन तक आपको हिरासत में रखना है तो उसे मजिस्‍ट्रेट से परमिशन लेनी होगी. तभी वो आपको लम्बे समय तक हिरासत में रख पाएंगी.

पांचवा अधिकार: जिन पुलिस अधिकारियों ने आपसे पूछताछ की हो, आपको उनका नाम जानने का अधिकार है. राजीव कहते हैं कि आप जब तक पुलिस कस्टडी में हैं, तब तक हर 48 घंटों में अपनी मेडिकल जांच करवाने का अधिकार है.और ये अधिकार इसलिए दिया गया ताकि पुलिस के द्वारा मारपीट करने पर आपको कोई ज्यादा गंभीर चोट तो आप पुलिस के खिलाफ केस दर्ज़ करा सकते है.